समाज की रूढ़ीवादी परंपराएं भक्ति मार्ग में बाधक

समाज की रूढ़ीवादी परंपराएं भक्ति मार्ग में बाधक


आज के समय में सामाजिक रूढ़ीवादी रीति रिवाज और पाखंड परंपराएं इतनी ज्यादा प्रचलन में है कि हम मध्यम स्तर के लोग अपने ही बनाए हुए इस मकड़जाल में अब फंसते जा रहे हैं।
और अभी स्थिति इतनी जटिल हो चुकी है कि यदि हम समय रहते इनसे निकलने का प्रयास नहीं करेंगे तो हमारा यह अनमोल मनुष्य जीवन इसी मकड़ी जाल में फंस कर एक दिन समाप्त हो जाएगा।
 आज का चर्चा का विषय इन्हीं सामाजिक रीति रिवाजों से निकलने के बारे में है...!!👇👇

इनसे निकलने के लिए हमें एक सुनियोजित तरीके से आध्यात्मिक मार्ग पर चलना होगा अर्थात हमें हमारे सद ग्रंथों को हमारे जीवन में उतार कर उसके अनुरूप भक्ति साधना करनी होगी जो हमें उस पूर्ण परमात्मा से परिचित करवा सके तथा हमारे अनमोल जीवन का मोल हम समझ सके।

 दहेज प्रथा..!!
विवाह में अत्यधिक फिजूल खर्च किया जाना..!
सामाजिक रूढ़ीवादी परंपराएं जो शास्त्र विरुद्ध हैं..!!
तत्वज्ञान के अभाव में नशीली पदार्थों का सेवन कर अपना मनुष्य जीवन बर्बाद करना..!! इत्यादि।
ऐसी बहुत सी समस्याएं हैं जो आज हम तत्व ज्ञान के अभाव में करते आ रहे हैं जो हमारे मनुष्य जीवन के लिए घातक है।
और आज इन समस्त परेशानियों से बचने के लिए तथा एक सुखी जीवन जीने के लिए हमें शास्त्र विधि अनुसार पूर्ण परमात्मा जो सिर्फ एक हैं उनकी भक्ति करना अति आवश्यक है।
तो हमें इसके लिए तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी के ज्ञान को अवश्य सुनना चाहिए जो इस धरती पर आज सिर्फ एकमात्र है जो शास्त्र विधि अनुसार साधना बताते हैं तथा उस एक परमात्मा से परिचित करवाते हैं जो गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता स्वयं बता रहे हैं..!!



समस्त मानव समाज से यह आग्रह है कि वह एक बार तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का सत्संग अवश्य सुने देखें साधना टीवी चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक
मनुष्य जीवन समझने के लिए हमें परमात्मा का सच्चा मार्ग जानना अत्यंत आवश्यक है...!!

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